जिंदा हूँ
दासतां है कुछ पुरानी, इस पत्ते की ज़ुबानी जो मुझसे कह रहा है ... पत्जहरो में दबे राहों की खबर नहीं, मंद हवाओ से पूछता हूँ सूरज की खबर नहीं धुन्दले आकाश की रौशनी में जिंदा हूँ सताए गए हर दुर्रानी यादोँ से जीने की आस चुनता हूँ कहने को जीने की आस है पर ख...
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Dev
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[17 Dec 2008 01:37 AM]



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