पास हो ...
सूरज की और एक आंख , एक हाथ तेरे साथ प्यारा हो सुबह की वो गर्मी ना कोई बादल का हाथ धीमी हो वो हवा ना हो कोई रुका घुटन सा दीवार गीतों की हो वो बोल जिनमें गाये सारा समां बरसे पास कोई झील, जैसे नाचे मेरे साथ कोई पतंग जो मुझे झुआये हौले हौले घास हो कोई नर...
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Dev
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[10 Jan 2009 21:41 PM]



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