सिफर

सलाम करता चलूं तुम्हारे लिये मैंने कुछ नहीं खरीदा ईश्वर को भी आजतक कुछ नहीं दिया मां भी वंचित है मेरे द्वारा कुछ भी पाने से, तुम सबों से अभी तक लेता ही आया हूं, ममता की छांव, मां की आंचल से, ईश्वर ने दिया है ये जीवन, और तुमने, तुमने दिया है प्रेम, जीने की वजह. सोचत... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[06 Jun 2009 03:42 AM]

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