मुंहजोड नींद

सलाम करता चलूं नींद भूल सा गई है रास्ता मेरे दरवाजे तक का. जाने किस गली गुम हो गई है? किस चौखट डेरा जमाये हुए है? जाने किस विचार ने रोक रखा है उसे मेरे पास आने से? वैसे सुना है विचार सौत है नींद की. नींद न हुई महबूबा हो गई. मुझे याद है मैं रिषिकेश गया था और एक गुरु... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[05 Jun 2009 08:35 AM]

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