बनकर फूल खिलो
बनकर फूल खिलो गुलशन में, डरकर तुम क्या पाओगेजो पाया है बांट दो सबकुछ, लेकर तुम क्या जाओगेहंसते खिलते चेहरो से, दिल का दर्द मिटाओगे बांटोगे जो बबूल के बीज, बेर कहां से पाओगेखुशी के दीप जलाकर तुम, गम की रात भगाओगेसूरज को दिखा के राह, नया सवेरा लाओगेबनक...
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ritu raj
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[07 Jun 2009 15:17 PM]



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