कितना साधारण

सलाम करता चलूं होठ पे हंसी की बूंदाबूंदीआंखों में ख्वाबों की चहल-पहलइशारों में कलाकारीबातों से तीरंदाजीसब बातें तुममेसबकुछ खास तुम्हाराऔर मैं... कितना साधारण.... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[14 Aug 2009 15:16 PM]

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