आपकी याद...
हर रोज आपको भूल जाने की कसम खाते हैं, रोज अपनी ही कसम भूल जाते हैं। कैसे भला आपकी याद दिल से निकाले हम, आप रोज ख्वाब में आकर जो हमें मिल जाते हैं।। तन्हा ये जिंदगी का सफर होगा, न कोई साथी, न हमसफर होगा। क्या गुजरता है राह में खुदा जाने, मुश्किल मग...
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भारत मल्होत्रा
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[30 May 2009 08:49 AM]



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