अब ऐतबार के रिश्ते खत्म हुए जाते हैं..
अब ऐतबार के रिश्ते खत्म हुए जाते हैं, लोग दगा पे दगा दिए जाते हैं। किससे निभाएं रिश्तों का मिजाज, यहां रोज रिश्ते कत्ल किए जाते हैं। हम भरोसे का भरम पालते रहे, लोगों का खून भी पानी हो गया। हम हर बात को हंसी में टालते रहे, यहां हंसना रोना बेमानी हो...
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भारत मल्होत्रा
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[08 Jun 2009 07:33 AM]



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