नयी शुरुआत
कब तक जिंदगी को रोकर गुजारा जाए चलो, अब तो इक पल हंस के संवारा जाए। हम तो बहाकर आंसू थक चुके हैं अब चलो, अब तो कुछ पल मुस्कुराया जाए। तमाम, रातें पुरानी अब दफन कर दो, चलो, नयी सुबह के नये सूरज को निहारा जाए। जो, लुट गए हैं काफिले भूल जाएं उन्हें अब...
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भारत मल्होत्रा
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[04 Jul 2009 01:58 AM]



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