... हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं
हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं, आंसू जुदाई के दिन रात पीते हैं। दुनिया में हमारा कोई नहीं हैं अपना, आंखों में मेरी कोई न कोई है सपना। बस उम्मीद के दीए जलाए जीते हैं, हम तो चाहत के गम उठाए जीते हैं। इश्क में न हार और न जीत का अहसास होता है, महबूब का...
[पूरी पोस्ट]
भारत मल्होत्रा
8
0
0
0
0
[07 Sep 2009 08:53 AM]



Shuffle








