सुनो ...! बन्दर से बने हुए 'डार्विन'...
सुनो कान खोल कर बन्दर से बने हुए डार्विन...! तुमने ये 'जंगल का कानून' लिखा है। सभ्य समाज में तुम्हारा 'सर्वाइवल ऑफ़ दि फिटेस्ट ' कुछ नहीं होता। 'सब बराबर होते हैं ', 'मिलकर जीते हैं ' कोई कमज़ोर का हक़ नहीं मारता..... सभ्य समाज में 'शॉपिंग मॉल' नहीं ह...
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Deepak Tiruwa
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[03 May 2009 04:28 AM]



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