कालिदास लौट जाएगा ...
आँख खुलती है सुबह तो देखता हूँ सिर के दर्द की तरह पूरब से उगता , आग का गोला। रात की बहस - दिन के काम याद आते हैं , चौबीस घंटे के संकरे से थैले में क्या - क्या ठूंसना पड़ता है ? यही सोचता हुआ उठ पडूंगा , सिगरेट सुल्गाऊंगा , पैर में उलझती चप्पल को लात म...
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Deepak Tiruwa
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[08 Jul 2009 00:38 AM]



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