अँधेरे में - 8

मुक्तिबोध एकाएक हृदय धड़ककर रुक गया , क्या हुआ  !! नगर से भयानक धुआँ उठ रहा है , कहीं आग लग गयी , कहीं गोली चल गयी। सड़कों पर मरा हुआ फैला है सुनसान , हवाओं में अदृश्य ज्वाला की गरमी गरमी का आवेग। साथ - साथ घूमते हैं , साथ - साथ रहते हैं , साथ - साथ सोते... [पूरी पोस्ट]
writer रंगनाथ सिंह
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[15 Dec 2009 05:04 AM]

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