चतुर, चोर, चारण की चरणवंदना
चुनाव की चहचहाहट में चीनी के बढे हुए दाम भी बेमानी से लगाने लगे हैं। मंदी की महामारी में भी मन बल्लिओं उछल रहा है, अरे मेरा नही भाई! ये हाल है, देश के ६७ करोड़ १४ लाख ८७ हज़ार ९३० मतदाताओं का। इन्ही मतदाताओं को लुभाने के लिए मनमाने कम भी किए जा रहे है...
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मनोज द्विवेदी
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[14 Mar 2009 06:12 AM]



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