स्विस बैंक बोलते नेता, सिसियती जनता!
सच मानिये चुनावी पारे ने प्राकृतिक पारे की गर्मी को मत दे दी है। पता नही क्यूँ भारतीय राजनीती की गर्माहट को गर्मियों में ही गर्म हंडी पर रखा जाता है। यानि चुनाव की तारीखें तपती दुपहरिया में क्यों पड़ती हैं। खैर ये कोई राष्ट्रीय मुद्दे जैसा प्रश्न नही...
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मनोज द्विवेदी
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[01 Apr 2009 08:19 AM]



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