दर्द को कोई नाम दो!
दर्द को कोई नाम न दो, मुझे खुशी की कोई शाम न दो दर्द को कोई नाम न दो.... दिन के उजाले में सोते हुए जागते लोगो को मोहब्बत का कोई पैगाम न दो दर्द को कोई नाम न दो..... शाम ढलते ही चिंगारियां जलाये अधरों पर ठंडी लाशों को मीठी सी कोई मुस्कान न दो दर्द को...
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मनोज द्विवेदी
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[06 Apr 2009 06:12 AM]



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