उधार से

aahuti गुनगुनाती गुई आती है फलक से बूंदें फ़िर कोई बदली तेरी पाजेब से टकराई है. बारिश को देख रह नही गया तो कुछ लाइन उधर की ली कुछ तस्वीरें भी ..... छत टपकती है और घर में ' वो ' मेहमान है पानी - पानी हो रही है आबरू बरसात में ।... [पूरी पोस्ट]
writer shelley
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[23 Jul 2009 04:37 AM]

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