२ बात का बतंगड़ बनाना मेरी पुरानी आदत

बात का बतंगड़... २. बात का बतंगड़ बनाना...मेरी पुरानी आदत ! मैं अब पड़ोसी के नौकर के साथ सट कर खड़ी थी! नौकर को कोई तकलीफ नहीं थी...क्यों की मैं छोटी बच्ची थी! मुझे लगा की नौकर की पैंट की जेब ....मेरी तरफवाली... कुछ फूली हुई है! मैंने हाथ लगाया तो कुछ सॉलिड सी भी लगी.... [पूरी पोस्ट]
writer aruna kapoor 'jayaka'
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[10 Oct 2008 06:49 AM]

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