गिरीश कारनाड के नाटक तुगलक की भाषा और संवाद
सल्तनतकालीन शासक वर्ग से संबंधित होने के कारण तुगलक की भाषा और संवाद अभिजातवर्गीय हैं। इनमें दरबारी अदब-कायदों की बारीकियों को समाविश्ट किया गया है। इसके एक-दो चरित्रों को छोड़कर शेष सभी चरित्र मुसलमान हैं, इसलिए वे नफीस और अदब-कायदों वाली उर्दू बोलते...
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डॉ.माधव हाड़ा
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[22 Jun 2008 09:28 AM]



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