तुगलक का हिंदी नाटक पहला राजा से साम्य-वैषम्य

अपनी बात भाषायी भिन्नता के बावजूद आधुनिक भारतीय साहित्यकारों की चिंताए, सरोकार और द्वंद्व कमोबेश एक जैसे हैं। नेहरूयुगीन मोहभंग के यथार्थ को 1964 में तुगलक में कन्नड़ रंगकर्मी और नाटककार गिरीश कारनाड ने मध्यकालीन मुस्लिम शासक मुहम्मद बिन तुगलक के रूपक प्रस्तुत... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.माधव हाड़ा
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[03 Aug 2008 13:04 PM]

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