भारतीय परिप्रेक्ष्य में आधुनिक कन्नड़ साहित्य

अपनी बात कन्नड़ साहित्य भारतीय साहित्य का अभिन्न अंग है। इसका विकास क्षेत्रीय जरूरतों के तहत अलग ढंग से हुआ है, लेकिन संपूर्ण आधुनिक भारतीय साहित्य से बहुत अलग नहीं है। इसके सरोकार, चिंताएं और आग्रह कमोबेश वही हैं, जो दूसरी भारतीय भाषाओं के साहित्य के हैं। कन्... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.माधव हाड़ा
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[29 Aug 2008 13:42 PM]

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