विविध सरोकारों वाली पैनी व्यंग्य रचनाएं

अपनी बात हिंदी में साहित्यिक सक्रियता इस कदर कथा-कविता एकाग्र रही है कि उसमें कथेतर गद्य विधाओं की कोई खास पहचान नहीं बन पाई। हरिशंकर परसाई, शरद जोशी आदि कुछ रचनाकारों ने अपनी असाधारण प्रतिभा से बीच में व्यंग्य को एक मुक्कमिल साहित्यिक अनुशासन की पहचान दिलवाई... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.माधव हाड़ा
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[09 Nov 2008 08:25 AM]

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