ख्वाहिशें
१ . सुनती हैं ,बोलती हैं ,हंसती हैं ,रोती हैं बेखौफ,बियाबां में,बस भटकती रहती हैं खाव्हिशें क्यों इतनी अजीब होती हैं ? २. लोग ख्वाहिशों पे क्यों लगाम नहीं बाँधते हमेशा से इनकी उडाने लम्बी हुआ करती हैं चाँद के बाद सूरज पे पहुँच, झुलस पड़ती हैं|...
[पूरी पोस्ट]
निपुण पाण्डेय
14
0
0
0
0
[03 May 2009 10:57 AM]



Shuffle








