समझ..बौनी हो गई है

अपूर्ण अक्सर कुछ ऐसा होता है कि कुछ लिख रहा होता हूँ और मन भटकता हुआ कहीं और चला जाता है और अंत में कुछ और ही बन पड़ता है .... इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ .... आज समय के चक्र में घूमता हुआ आ चुका हूँ दूर पर अब चाहता हूँ लौटना | लौटना चाहता हूँ , फिर से जीना चा... [पूरी पोस्ट]
writer निपुण पाण्डेय
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[04 Jul 2009 05:39 AM]

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