ज़िन्दगी का सफ़र...

अपूर्ण लम्बा तो बहुत ये ज़िन्दगी का सफ़र है धूप है, छाँव है, ख़ुशी भी हर डगर है| बैठ के दो पल जो करें इसका सामना मुस्कुरा के देख यहाँ रंगीन हर सफ़र है| मौसम हैं कई इस दुनिया में खुदा की हर हाल में जीना है तू इंसान अगर है | साकी मेरे पैमाने में कुछ रंग तो भर... [पूरी पोस्ट]
writer निपुण पाण्डेय
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[14 Jul 2009 04:45 AM]

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