मैं अपूर्ण......

अपूर्ण बहुत दिनों से ये रिश्ता कुछ ऐसा बन गया है की बस अब कभी भी तुम कुछ न बोलो तो लगता है जैसे कुछ अधूरा सा रह गया | सोचा आज तुम पर ही कुछ लिखूं या फिर तुम चली आई अपने आप कुछ बन कर ...... बादल उमड़ते हैं, तुम आती हो बादल बरसते हैं, तुम आती हो हवा की छुन-मु... [पूरी पोस्ट]
writer निपुण पाण्डेय
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[16 Jul 2009 02:56 AM]

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