कूड़े में ब्लाग की पेशकश बंद करिए
मीडिया की नई सीमित विधा के पेंच जगजाहिर हो रहे हैं। ब्लाग । एक ऐसा माध्यम जो यूटोपिया में ज्यादा जीता है, अपने विस्तार से पहले अनजानी व्यक्तिगत बहसों में सिमटता जा रहा है। जानते हैं क्यों। क्योंकि संवाद के जिस माध्यम को ब्लाग की दुनिया सर्वव्यापक मान...
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Bhavya
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[19 Jun 2007 10:26 AM]



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