अब के गिरो तो ज़रा संभल के गिरियेगा !

Anwar Qureshi चलते चलते अगर आप के कभी पाँव फिसल जाये इससे पहले कोई देखे आप खुद ही संभल जाएँ या अगर ना संभल सके तो समाज के उस चहरे का मज़ाक बनने के लिए तैयार रहे जो आप को कही दूर टक टकी लगाये देख रहे है , जिसे इस बात में मज़ा आ रहा है की वह इंसान सड़क पर फिसल के गिरा... [पूरी पोस्ट]
writer Anwar Qureshi
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[10 Dec 2008 17:43 PM]

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