सूखे पत्तों सी है ज़िन्दगी !!!
पतझड़ में जब मैंने अपने , पच्चीस साल पुरे किये , तब टहनियों से टूट के ज़मी पर आया , आते ही सामना हवाओं से हुआ खूब थपेड़े खाए , जिधर उसने चाह बस चल दिए फ़िर धीरे से बारिश की बुँदे पड़ी उसने थोड़ा सा सुकून पहुँचाया , भिगो करके उसने दी मुझको रहत सोंधी सोंधी...
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Anwar Qureshi
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[10 Dec 2008 17:43 PM]



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