ऐं ज़िन्दगी ...
ऐं ज़िन्दगी , तू मुझे कहीं दूर लेके चल ! जहाँ सिर्फ़ मैं हूँ , और मेरी तन्हाई हो ! न कोई रौशनी , न कोई परछाई हो ! ऐं ज़िन्दगी तू मुझे कहीं दूर लेके चल !! मुझे दुनिया का नहीं , अपनों से डर है , हज़ार चहरे है लेकिन , हमदर्द कोई नहीं है ! कुछ है अगर तो...
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Anwar Qureshi
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[16 Aug 2008 03:16 AM]



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