आरज़ू ...
आसमां सी आरज़ू है , ख़ाब से हालात हैं ! जीने की है तमन्ना , थमी थमी सी सासं है !! फिरता हूँ मैं दर बदर , मिलता नहीं है आसरा ! इस ज़मी पर आशियाने , की मुझे तलाश है !! सारा शहर है बेरहम , कोई नहीं मेरा अपना ! काफ़िले में नज़रों को मेरी , मेरे अपनों की तला...
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Anwar Qureshi
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[03 Sep 2008 14:35 PM]



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