ये मेरी ज़िन्दगी ...
ये मेरी ज़िन्दगी बिस्तर की सिलबटों की तरह है , हर रोज़ ये जीती है हर रोज़ ये मरती है ! कुछ ख़ाब से बनते है , बन के टूट जातें है , फ़िर भी ना जाने ये किस आस में जीती है !! कुछ दर्द है हासिल , कुछ तन्हाई का आलम है , हर आहट में ये लेकिन ,किसी का इंतेज़ार क...
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Anwar Qureshi
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[25 Sep 2008 14:59 PM]



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