मुक्तक 11
गहनता को कब मेरी पाया है किसने मेरे सच को दरपन दिखाया है किसने मैं ' माँ ' हूँ मुझे कोई इतना बताए मेरे दूध का ऋण चुकाया है किसने ये आशाएँ मुझसे हैं, अरमान मुझसे जगत में है जीवन का वरदान मुझसे न होती तो उसको भी उपमा न मिलती गगन पर है चंदा की पहचान मुझ...
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डा.मीना अग्रवाल
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[26 Oct 2008 15:07 PM]



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