मेरा प्यार
आती है याद तुम्हारी जब भी, शीशे में एक अक्स उतार लेता हूँ। निहारता हूँ तुम्हें अपलक फिर, आंखों के रास्ते दिल में उतार लेता हूँ। चाहता है दिल एक तस्वीर बनाने को जब, कनबस या कागज़ पर रंग बिखेर लेता हूँ। सपनों की दुनियाँ में खोकर जब, रोक नहीं पाता तुम्हा...
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Keshav Dayal
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[29 Sep 2008 14:10 PM]



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