बेरुखी

Immortal Things in Mortal Lives एक दिन था जब तुम दामन छुड़ाते थे औरों से सिर्फ़ मेरे लिए, एक दिन आज है कि तुम दामन छुड़ाते हो मुझसे औरों के लिए. शायद जब अपनों की ही बेरुखी से अपने को आहत पाते हैं लोग, छोड़ देते हैं साथ अपनों का अपने एक नया घर बसाते हैं लोग । BERUKHEE Ek din tha jab tu... [पूरी पोस्ट]
writer Keshav Dayal
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[18 Sep 2008 12:55 PM]

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