ऐसा भी एक दीप जले
बहें बयारें शान्ति ज्ञान की, अन्धकार सब छंट जाए फट जाय तिमिर की काली चादर, जग प्रकाशमय हो जाए मलयानिल से आए सुरभित सुगंध, सौरभ जग में छा जाए छलके स्नेह अमिय की गागर, डगर प्यार की आ जाए AISA BHI EK DEEP JALE Bahein bayaarein shaanti gyaan ki, Andhkaar...
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Keshav Dayal
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[02 Oct 2008 12:57 PM]



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