मेरी चाहत
सुगंध भरी सबा जगाए हर प्रातः, आशा की किरन दे उषा की लालिमा मिले हिमालय से विश्वास अडिग पर्वत सा, गीता से ज्ञान मिले, मिट जाए सारी कालिमा भर दे सागर गहराई तेरे चिंतन में, तितलियाँ भरें नित नये रंग जीवन में रक्षक बनें दया और लज्जा तुम्हारे, बनें शील आभ...
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Keshav Dayal
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[18 Oct 2008 03:01 AM]



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