आओ हम तुम मिलकर ........
आओ हम तुम मिलकर इस जहाँ में सच्चा प्यार ढूँढें कुछ तुम्हारी रूबाइयों को देखें कुछ मेरी ग़ज़ल के अशआर ढूँढें मुहब्बत का दरिया भी रीत गया ठूंठ इश्क के बाग़ हुए इस चमन मे अब खिजां की बस्ती है आओ हम इसके लिए बहार ढूँढें कभी यहाँ शायर मुहब्बत की ग़ज़ल कहत...
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dushyant
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[03 May 2008 09:33 AM]



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