पगली सी इक लड़की ........

चंद मुट्ठी अशआर मैं जब चाँदनी के साथ छत पर टहलता हूँ चाँद हाथों से छुपाती है वो पगली सी लड़की उसकी इस चुहल पर जब खीज उठता हूँ मैं तो खिलखिलाती मुस्कुराती है वो पगली सी लड़की मैं जब कागज़ पर स्याही से ग़ज़ल लिखता ह तो संग संग गुनगुनाती है वो पगली सी लड़की कभी जिदें बच्... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[29 Mar 2008 08:06 AM]

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