एक वाकया चंद पंक्तियाँ ........

चंद मुट्ठी अशआर भोपाल से रतलाम के सफर मे एक जोडा सामने की सीट पर ट्रेन मे बैठा था। मोह्तार्रम मुसलसल मोहतरमा पर बरस रहे थे और इल्जाम था कि वे इतनी ज्यादा पार्टियों मे क्यों शामिल होती हैं। लगातार नए पुराने वाकयों का हवाला देकर यह दर्शाने कि कोशिश की जा रही थी कि उनक... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[29 Mar 2008 08:25 AM]

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