मैंने इस दिल पर.....

चंद मुट्ठी अशआर मैंने इस दिल पर बाँध सा बना दिया है मुहब्बत का दरिया अब इसके पार होता नहीं जाने क्यों अब जब भी लिखने बैठता हूँ मेरी ग़ज़ल मे इश्क का अशआर होता नहीं तुझसे नजदीकियां खो न दूँ इसलिए फासला रखा है मैंने खुशनसीब हूँ की तू इस पर बेजार होता नहीं आजकल नई हवा बह... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[02 May 2008 08:22 AM]

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