अपने होठों पर ....

चंद मुट्ठी अशआर अपने होठों पर सजाना चाहता हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ कोई आँसू तेरे दामन पर गिराकर बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ थक गया मैं करते-करते याद तुझको अब तुझे मैं याद आना चाहता हूँ छा रहा है सारी बस्ती में अँधेरा रोशनी हो घर जलाना चाहता हूँ आखिरी हिचक... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
views
10
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[24 Jun 2008 09:55 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix