बादलों का .........

चंद मुट्ठी अशआर बादलों का काफिला आता हुआ देख कर अच्छा लगता है प्यासी धरती को सावन का मंज़र अच्छा लगता है इस भरी महफिल-ऐ-दुनिया मे उसका चंद लम्हों के लिए मुझसे बात करना, मिलना और देखना अच्छा लगता है जिन का सच होना किसी सूरत मे भी मुमकिन नहीं ऐसी ऐसी बातें अक्सर सोचकर... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[02 May 2008 07:59 AM]

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