यूँ ही .....

चंद मुट्ठी अशआर यूँ ही चुप रहोगे न हाल-ऐ-दिल कहोगे तो इस बाज़ार में तुम्हे कौन चुनेगा ये आवाजों की नुमाइश है जान लो ज़रा खामोशियों की सदायें यहाँ कौन सुनेगा दुष्यंत............. [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[19 Jul 2008 00:24 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix