किसी और के पास कहाँ ....

चंद मुट्ठी अशआर तुम्हारी जो ख़बर हमें है वो किसी और के पास कहाँ देख लेता हूँ कहकहों में भी आंसू के कतरे ऐसी नजर किसी और के पास कहाँ ज़माने ने ठोकरें दी पत्थर समझकर तुने मुझे सहेज लिया मूरत समझकर होगी अब हमारी गुजर किसी और के पास कहाँ उम्र भर देख लिया बियाबान में भटक... [पूरी पोस्ट]
writer dushyant
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[28 Nov 2008 07:29 AM]

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