एक पैगाम !

कलम का सिपाही राजेश त्रिपाठी एक पैगाम नर्म बिस्तरों पर रातें गुजारनेवालों को नाम। वे जो मुफलिसों की तबाही पर घड़ियाली आंसू बहाते हैं वे जो आश्वासन देकर रह जाते हैं एक दिन ऐसा भी आयेगा जिस दिन उनकी अस्तिमता को पक्षाघात लग जायेगा छीज जायेंगी उनकी ताकतें होंगे निरस्त... [पूरी पोस्ट]
writer Rajesh Tripathi
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[19 Aug 2009 09:13 AM]

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