मज़ा आ रहा है,
पलक दर पलक कुछ नया आ रहा है, बदलने दो जीवन मज़ा आ रहा है, कभी जो किताबों में किस्से पढे थे, पलटते-पलटते, पलटते बङे थे, खङे थे कभी जो पहाङों के ऊपर, अचानक ज़मीं पर वो औंधे पङे थे, हद-ए-मोङ पर रास्ता आ रहा है, बदलने दो जीवन मज़ा आ रहा है। कई रास्ते जैसे ह...
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RUPAK_REWA
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[29 Oct 2008 03:31 AM]



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