जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
पठान के आखिरी ऒवर की चौथी गेंद फेंकने की देर थी कि बस...उसके बाद मैदान और दर्शक दीर्घा में अंतर करना नामुमकिन सा हो गया, 105 करोङ (..और जारी) भारतीयों के गले रुँध गये, कुछ की आँखो की कोरों पर आँसू चिपक गये और कुछ के ढुलक पङे, जोश में मदमस्त किसने कैस...
[पूरी पोस्ट]
RUPAK_REWA
12
0
0
0
0
[05 Mar 2008 07:07 AM]



Shuffle








