मैं क्या हूँ?
मंद हुआ कोलाहल, हालाहल मन में भर बैठा हूँ, जो समक्ष, वो है सक्षम,वो ही उत्तम,तो मैं क्या हूँ? चढ आया अब तो सूरज सर, परछाईं तक छोटी है, अब तक तो थी कानाफूसी,प्रखर बात अब होती है, हर करतल,हर नज़र पूछती,मैं उसका क्या लगता हूँ? जो समक्ष, वो है सक्षम,वो ही...
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RUPAK_REWA
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[29 Oct 2008 03:31 AM]



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