ऊँगलियाँ उदास, पाँव पूछते नहीं पता...

M A D (Make A Difference) बिन जली वो बिजलियाँ , जो तार से लटक रहीं, नहर ठहर गयी है प्यास, भागती सङक रही। ऊँगलियाँ उदास, पाँव पूछते नहीं पता, वो कँपकँपी कपाल की गाल से ढुलक रही। डील की दलील में, दलील के दलाल गुम, सवाल का पता नहीं, जवाब की ढिशुम ढिशुम, दण्ड,भेद,साम,दाम, आम आदमी... [पूरी पोस्ट]
writer RUPAK_REWA
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[29 Oct 2008 03:31 AM]

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